9 मिलियन भारतीयों की सुरक्षा पर 5 देशों से आपात बातचीत: राहत की कोशिश या बढ़ता खतरा? खाड़ी संकट के बीच जयशंकर की तेज कूटनीति
Middle East Shockwave :-मध्य पूर्व में अचानक भड़के अमेरिका-ईरान तनाव ने दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है। इसी गंभीर हालात के बीच भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने 28 फरवरी को खाड़ी देशों के अपने समकक्षों से लगातार बातचीत कर लगभग 9 मिलियन (90 लाख) भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तेज कूटनीतिक पहल शुरू की। भारत की यह सक्रियता एक तरफ राहत की उम्मीद जगाती है, तो दूसरी तरफ क्षेत्र में बढ़ते सैन्य टकराव से गंभीर खतरे की आशंका भी बनी हुई है।
5 खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों से लगातार संपर्क
Middle East Shockwave
सूत्रों के अनुसार, जयशंकर ने एक के बाद एक पाँच प्रमुख खाड़ी देशों—
- United Arab Emirates
- Saudi Arabia
- Qatar
- Kuwait
- Bahrain
के विदेश मंत्रियों से बात की। उन्होंने खासतौर पर Faisal bin Farhan Al Saud (सऊदी विदेश मंत्री) से बातचीत में क्षेत्रीय शांति और वहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा को भारत की प्राथमिकता बताया। कुवैत के विदेश मंत्री Sheikh Jarrah Jaber Al-Ahmad Al-Sabah ने ताजा हालात की जानकारी देते हुए भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया। बहरीन के विदेश मंत्री Abdullatif bin Rashid Al Zayani ने भी भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। कतर की ओर से भी इसी तरह के सकारात्मक संकेत मिले।
ईरान और इज़राइल से भी सीधी बातचीत
संकट को कम करने के लिए जयशंकर ने सीधे Iran और Israel के विदेश मंत्रियों से भी बातचीत की। उन्होंने Seyed Abbas Araghchi और Gideon Sa’ar से संवाद और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की अपील की। भारत का स्पष्ट संदेश रहा— “डायलॉग और डिप्लोमेसी ही समाधान है।”
‘Operation Roaring Lion’ और ‘Operation Epic Fury’ से भड़का संकट
28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया।
- इज़राइल ने इसे Operation Roaring Lion नाम दिया
- अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इसे Operation Epic Fury कहा
इसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएई के दुबई स्थित प्रतिष्ठित होटल Burj Al Arab के पास ड्रोन मलबा गिरने की खबर सामने आई, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।
हवाई सेवा बाधित, एयरस्पेस बंद
तनाव बढ़ते ही कई खाड़ी देशों ने अस्थायी रूप से अपना एयरस्पेस बंद कर दिया।
भारत की प्रमुख एयरलाइंस—
- Air India
- IndiGo
ने खाड़ी क्षेत्र के लिए उड़ानें निलंबित कर दीं। अबू धाबी और दुबई में भारतीय दूतावासों ने भारतीय नागरिकों को “जहां हैं वहीं सुरक्षित रहें” (shelter-in-place advisory) का निर्देश जारी किया है।
90 लाख भारतीयों पर मंडराता संकट
भारत सरकार की चिंता की सबसे बड़ी वजह है खाड़ी क्षेत्र में भारतीयों की विशाल संख्या। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:
- कुल मिलाकर GCC देशों में 90 लाख से अधिक भारतीय
- केवल यूएई में लगभग 35 लाख
- सऊदी अरब में करीब 26 लाख
यह क्षेत्र दुनिया भर में बसे प्रवासी भारतीयों का लगभग 66% हिस्सा समेटे हुए है।अगर स्थिति और बिगड़ती है तो यह सिर्फ मानवीय संकट नहीं बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि खाड़ी से आने वाला रेमिटेंस भारत की विदेशी मुद्रा आय का महत्वपूर्ण स्रोत है।
1.8 लाख भारतीयों की ऐतिहासिक वापसी
भारत पहले भी खाड़ी संकटों में बड़े स्तर पर निकासी अभियान चला चुका है। 1990 में कुवैत पर इराकी आक्रमण के दौरान भारत ने करीब 1,80,000 नागरिकों को एयरलिफ्ट किया था, जो आज भी दुनिया के सबसे बड़े नागरिक निकासी अभियानों में गिना जाता है। इस अनुभव के कारण भारत के पास संकट प्रबंधन की मजबूत रणनीति और संस्थागत क्षमता मौजूद है।
भारत के लिए 3 बड़े सवाल
- क्या यह संघर्ष सीमित रहेगा या व्यापक युद्ध में बदलेगा?
- क्या भारतीयों की सुरक्षित निकासी की जरूरत पड़ेगी?
- तेल की कीमतों और शेयर बाजार पर इसका कितना असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा जारी रहती है, तो वैश्विक तेल सप्लाई पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे भारत में महंगाई और बाजार अस्थिरता बढ़ सकती है।
राहत की कोशिश, लेकिन जोखिम बरकरार
जयशंकर की सक्रिय कूटनीति ने फिलहाल भारतीय समुदाय को भरोसा दिया है। खाड़ी देशों की ओर से मिले आश्वासन सकारात्मक संकेत हैं। लेकिन जमीनी हालात तेजी से बदल रहे हैं। सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का सिलसिला जारी रहा तो लाखों भारतीयों की सुरक्षा, भारत की ऊर्जा जरूरतें और आर्थिक स्थिरता—तीनों पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल, भारत की रणनीति साफ है:
संवाद, सतर्कता और अपने नागरिकों की हर हाल में सुरक्षा। यह संकट सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि भारत जैसे बड़े प्रवासी समुदाय वाले देश के लिए मानवीय और रणनीतिक चुनौती भी है। आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह राहत की दिशा में बढ़ेगा या बड़े खतरे में बदल जाएगा।
Must Read:- Israel Iran conflict impact on Indian stock बाजार में बड़ी गिरावट, एक्सपर्ट ने बताए 3 मजबूत स्टॉक्स
