ग्लोबल संकट की आहट: 555 मौतें, बाजार में झटका — US–Israel vs Iran युद्ध की समयसीमा क्या?US–Israel बनाम Iran की खतरनाक टक्कर
US Israel Conflict Timeline :- मध्य-पूर्व एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है। अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत के बाद हालात बेहद संवेदनशील और विस्फोटक हो गए हैं। ईरान ने जिस आक्रामक अंदाज़ में जवाब दिया है, उससे साफ है कि यह टकराव सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि हमला क्यों हुआ—बल्कि यह है कि यह जंग कितनी लंबी चलेगी और दुनिया पर इसका कितना भारी असर पड़ेगा।
शुरुआत कैसे हुई?(US Israel Conflict Timeline)
शनिवार को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के सैन्य ढांचे, मिसाइल ठिकानों और शीर्ष अधिकारियों को निशाना बनाते हुए व्यापक हमले किए। अमेरिकी प्रशासन ने इस ऑपरेशन को Operation Epic Fury नाम दिया। हमलों की पहली लहर में तेहरान स्थित परिसर ध्वस्त हो गया और खामेनेई की मौत की पुष्टि हुई। इसके साथ ही ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए। इज़राइली सेना Israel Defense Forces (IDF) ने दावा किया कि यह कार्रवाई “भविष्य के खतरे” को रोकने के लिए की गई।
अमेरिका और इज़राइल का तर्क
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कहा कि मकसद है—ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने हथियार नहीं डाले तो कार्रवाई जारी रहेगी। इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इसे “अस्तित्व की सुरक्षा” का सवाल बताया। उनका कहना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरे क्षेत्र के लिए खतरा है। हालांकि, ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है।
हमले के कुछ घंटों बाद ही ईरान ने मिसाइल और ड्रोन दागने शुरू कर दिए। इज़राइल के शहरों के अलावा कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। लेबनान से ईरान समर्थित संगठन Hezbollah ने भी इज़राइल पर रॉकेट दागे, जिससे संघर्ष का दायरा और बढ़ गया। साइप्रस में ब्रिटिश एयरबेस RAF Akrotiri पर ड्रोन हमला हुआ। हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन यह संकेत साफ है कि जंग सीमाओं से बाहर निकल रही है।
ईरान के राहत संगठनों के अनुसार अब तक 555 लोगों की मौत हो चुकी है। कई इलाकों में स्कूल और रिहायशी क्षेत्र भी हमलों की चपेट में आए हैं। इंटरनेट सेवाएं लगभग ठप हैं और हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया है। यह मानवीय संकट तेजी से गहराता दिख रहा है।
तेल और गैस बाजार में हलचल
इस संघर्ष का असर सिर्फ गोलियों और मिसाइलों तक सीमित नहीं है।
- सऊदी अरब की प्रमुख रिफाइनरी Ras Tanura Refinery पर ड्रोन हमले के बाद आंशिक शटडाउन
- कतर में LNG उत्पादन अस्थायी रूप से रुका
- होरमुज़ जलडमरूमध्य Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी
दुनिया के करीब 20% तेल-गैस की सप्लाई इसी मार्ग से गुजरती है। नतीजा—कच्चे तेल की कीमतों में 10% की तेजी और गैस में 25% तक उछाल। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह चिंता की बात है।
नया नेतृत्व कौन संभालेगा?
ईरान में अब अंतरिम नेतृत्व परिषद काम कर रही है, जिसमें राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हैं। अंतिम फैसला 88 सदस्यीय संस्था Assembly of Experts करेगी, जो नए सर्वोच्च नेता का चयन करेगी। लेकिन युद्ध के माहौल में यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी।
हवाई यात्रा पर बड़ा असर
कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द या स्थगित कर दी हैं। Air India, British Airways, Qatar Airways, Emirates, Lufthansa सहित कई कंपनियों ने मध्य-पूर्व की उड़ानों पर रोक लगा दी है। कोविड के बाद यह अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल सेक्टर के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
कितने दिन चलेगा यह युद्ध?
ट्रंप ने संकेत दिया है कि अभियान “चार से पांच हफ्ते” तक चल सकता है। नेतन्याहू ने भी कहा है कि यह कार्रवाई “जब तक जरूरी होगा” जारी रहेगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद हुआ या लेबनान का मोर्चा और खुला, तो यह संघर्ष लंबा और ज्यादा विनाशकारी हो सकता है।
निर्णायक समय
यह टकराव अब सिर्फ सैन्य रणनीति का मामला नहीं रहा। यह ऊर्जा बाजार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की जिंदगी को सीधे प्रभावित कर रहा है। भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती है—एक ओर तेल कीमतों का दबाव, दूसरी ओर खाड़ी में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा। अगले कुछ हफ्ते तय करेंगे कि यह संघर्ष सीमित दायरे में सिमटेगा या पूरे मध्य-पूर्व को एक लंबे और खतरनाक युद्ध में धकेल देगा। फिलहाल दुनिया की नजरें इसी पर टिकी हैं।

