7 बड़ी सुविधाओं के साथ बुजुर्गों को घर बैठे इलाज: ऐतिहासिक राहत या सिस्टम की अग्निपरीक्षा?
bihar saat nischay yojna:- बिहार की राजनीति में कई घोषणाएँ आईं और गईं, लेकिन 16 दिसंबर 2025 को हुई कैबिनेट बैठक के बाद जो फैसला सामने आया, उसने लाखों परिवारों का ध्यान खींचा। मुख्यमंत्री Nitish Kumar की अध्यक्षता में ‘सात निश्चय-3 (2025-2030)’ को मंजूरी दी गई, जिसमें सातवां संकल्प है — “सबका सम्मान–जीवन आसान”। सरल भाषा में कहें तो अब बिहार के 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को कई जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं उनके घर पर ही उपलब्ध कराने की योजना है। यह खबर राहत भी है और व्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा भी।
आधिकारिक स्रोत और तारीख
- कैबिनेट मंजूरी: 16 दिसंबर 2025 (मंगलवार)
- घोषणा: कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस
- सार्वजनिक बयान: मुख्यमंत्री ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी
- मीडिया स्रोत: Live Hindustan, ABP Live
- बजट संदर्भ: बिहार बजट 2026-27 (2 फरवरी 2026 को पेश)
क्या है “सबका सम्मान–जीवन आसान” योजना?( bihar saat nischay yojna)
यह योजना ‘सात निश्चय-3’ का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2025 से 2030 के बीच बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाना है। मुख्य फोकस: वरिष्ठ नागरिकों (60+) को घर बैठे स्वास्थ्य सुविधा देना।
घर बैठे मिलेंगी ये 7 बड़ी सुविधाएं
- नर्सिंग केयर – बिस्तर पर पड़े बुजुर्गों के लिए घर पर नर्स
- पैथोलॉजी टेस्ट – ब्लड सैंपल घर से
- ब्लड प्रेशर और ईसीजी जांच
- फिजियोथेरेपी सेवा
- आपातकालीन मेडिकल सहायता
- दवा उपलब्धता और फॉलोअप
- 80+ बुजुर्गों के लिए विशेष मोबाइल रजिस्ट्रेशन सुविधा
ग्राउंड रियलिटी: क्यों जरूरी थी यह योजना?
बिहार के आंकड़े क्या कहते हैं?
स्रोत: NHSRC Bihar Health Dossier, NFHS-5, Drishti IAS, PIB, Prabhat Khabar
- कुल आबादी: लगभग 13 करोड़
- 60+ बुजुर्ग: लगभग 7.9% (करीब 80 लाख+)
- ग्रामीण आबादी: 88.7%
- PHC: 1,702
- CHC: 57
- उप-केंद्र: 9,112
- डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात: लगभग 1:22,000
- WHO मानक: 1:1,000
स्पष्ट है कि स्वास्थ्य ढांचा पहले से दबाव में है। ऐसे में घर-घर सेवा देना बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।
किसे मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ?
1. सभी 60+ वरिष्ठ नागरिक:-कोई आय सीमा नहीं।
2. BPL परिवार के बुजुर्ग:-गरीब और जरूरतमंदों को प्राथमिकता संभव।
3. दिव्यांग बुजुर्ग:-घरेलू चिकित्सा सहायता विशेष रूप से उपयोगी।
4. अकेले रहने वाले बुजुर्ग:-सबसे बड़ा लाभार्थी वर्ग।
बजट और फंडिंग एंगल
- कुल बिहार बजट 2026-27: ₹3,47,589 करोड़
- अलग से योजना बजट घोषित नहीं
- अनुमानित खर्च: ₹500–1,000 करोड़ वार्षिक (विशेषज्ञ आकलन)
- संभावित एकीकरण: आयुष्मान भारत PM-JAY
यह योजना स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण विभागों में समाहित है।
विशेषज्ञों की राय
- मुख्यमंत्री का दावा: “सभी वर्गों के सम्मानजनक जीवन की दिशा में बड़ा कदम”
- प्रशासनिक सुझाव: PHC में बुजुर्गों के लिए अलग काउंटर, पंचायत स्तर पर शिविर
- मीडिया विश्लेषण: “योजना तो बहुत नेक है, पर असली पता तब चलेगा जब काम जमीन पर शुरू होगा।
अन्य राज्यों से तुलना
| राज्य | होम हेल्थ स्कीम | कवरेज | बजट |
|---|---|---|---|
| बिहार | सबका सम्मान–जीवन आसान | सभी 60+ | राज्य बजट 2026-27 |
| केरल | Vayomithram | वार्ड स्तर/BPL | ₹27.5 करोड़ |
| तमिलनाडु | सीमित | सामान्य कल्याण | स्पष्ट नहीं |
| दिल्ली | Senior Citizen Home Visit Program | चयनित बुजुर्ग | DFWO फंड |
केरल का Elderly Budget मॉडल निकटतम उदाहरण है, लेकिन बिहार का दायरा अधिक व्यापक है।
टाइमलाइन: 2005 से 2026 तक का सफर
| वर्ष | प्रमुख कदम | लाभ |
|---|---|---|
| 2005 | न्याय के साथ विकास | पेंशन विस्तार |
| 2015 | सात निश्चय-1 | पेंशन ₹500 |
| 2020 | सात निश्चय-2 | स्वास्थ्य शिविर |
| 2025 | सात निश्चय-3 | घरेलू स्वास्थ्य सेवा |
| 1 अप्रैल 2026 | पूर्ण क्रियान्वयन लक्ष्य | 60+ घर पर इलाज |
एक वास्तविक उदाहरण
सीवान जिले के एक गाँव में रहने वाली 72 वर्षीय कमला देवी का बेटा पंजाब में मजदूरी करता है। घुटनों के दर्द के कारण उन्हें PHC तक जाने में 5 किमी पैदल चलना पड़ता था।अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो कमला देवी जैसी लाखों माताओं को घर पर ही फिजियोथेरेपी और BP जांच मिल सकेगी। यही इस योजना की असली कसौटी है।
चुनौतियां जो नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं
डॉक्टरों की भारी कमी
ग्रामीण इलाकों में समय पर सेवा
लाभार्थी पहचान प्रक्रिया
शिकायत निवारण तंत्र
निगरानी और पारदर्शिता
योजना अच्छी है, लेकिन सिस्टम की अग्निपरीक्षा भी है।
सामाजिक और राजनीतिक असर
अगर सफल हुई तो:
बुजुर्गों का सम्मान बढ़ेगा
सरकार की छवि मजबूत होगी
सामाजिक सुरक्षा मॉडल बनेगा
अगर लागू नहीं हुई:
जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है
उम्मीद बड़ी, जिम्मेदारी उससे भी बड़ी
“सबका सम्मान–जीवन आसान” केवल नारा नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासन की परीक्षा है। बिहार जैसे बड़े और ग्रामीण राज्य में 80 लाख से अधिक बुजुर्गों तक घर-घर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना ऐतिहासिक कदम है। अब सबकी नजर 1 अप्रैल 2026 के बाद जमीन पर दिखने वाले परिणामों पर होगी।
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