US trade law limits presidential tariff power अमेरिका में बदला खेल: भारत की ट्रेड पावर हुई मजबूत, जानिए 4 बड़े कारण

ट्रंप टैरिफ पर ब्रेक: भारत के निर्यातकों के लिए राहत या नई चुनौती?

US trade law limits presidential tariff power: – अमेरिका में टैरिफ (टैक्स) को लेकर जो खींचातानी चल रही थी, उसमें भारत जैसे देशों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। वहां की सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बिना किसी ठोस कानून के अपनी मर्जी से भारी टैक्स नहीं ठोक सकते। यह फैसला सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की उस जिद पर लगाम लगाता है, जिसकी वजह से भारत के कारोबारियों की नींद उड़ी हुई थी। हालांकि, ट्रंप ने भी हार नहीं मानी है—उन्होंने एक पुराने कानून का हवाला देकर 150 दिनों के लिए 15% का कच्चा-पक्का टैक्स लगाने का ऐलान कर दिया है। यानी रास्ता अभी भी पूरी तरह साफ नहीं है। तो क्या ये फैसला वाकई भारत के लिए फायदे का सौदा है? चलिए समझते हैं

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1. भारतीय निर्यातकों को मिली बड़ी राहत

पिछले कुछ सालों से भारत के सामान जैसे कपड़े, गहने, इंजीनियरिंग का सामान और रोज़मर्रा की चीज़ों—पर अमेरिका में भारी टैक्स का बोझ था। कई बार तो ये टैक्स आम रेट से बहुत ज़्यादा वसूली जा रहे थे। अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद उम्मीद जगी है कि ये फालतू के टैक्स कम होंगे या पूरी तरह हट जाएंगे। इसका सीधा फायदा यह होगा कि भारतीय सामान अमेरिकी बाज़ार में फिर से सस्ते और मुकाबले के दाम पर बिक सकेंगे। हमारे छोटे और मंझोले कारोबारियों (MSMEs) के लिए तो यह किसी बड़ी लॉटरी से कम नहीं है।

2. अनिश्चितता कम, कारोबार में भरोसा बढ़ा

बिजनेस की दुनिया में सबसे बड़ा डर अनिश्चितता (यानी ‘कल क्या होगा’) का होता है। पूरे 2025-26 के दौरान यही डर बना हुआ था कि अमेरिका कब अचानक टैक्स बढ़ा दे और खेल बिगड़ जाए। अब कोर्ट के फैसले ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रपति भी अपनी मनमर्जी नहीं चला सकते। इससे भारतीय कंपनियों को आगे की प्लानिंग करने में हिम्मत मिलेगी चाहे नई फैक्ट्रियां लगानी हों या अमेरिकी मार्केट के लिए खास सामान तैयार करना हो। अब माहौल में पहले से ज़्यादा स्थिरता और भरोसा नज़र आ रहा है।

 

3. व्यापार समझौते में भारत की स्थिति मजबूत

अभी कुछ समय पहले भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर एक समझौता (Interim Trade Framework) हुआ था, लेकिन भारी टैक्स का डर हमेशा भारत के सिर पर तलवार की तरह लटक रहा था।

पर अब पासा पलट रहा है। जब वहां की कोर्ट ने ही मनमाने टैक्स पर सवाल उठा दिए हैं, तो अब भारत अमेरिका के सामने अपनी शर्तें ज़्यादा मज़बूती से रख पाएगा। अब बात ‘दबाव में’ नहीं, बल्कि ‘बराबरी’ की होगी। यह हमारी अर्थव्यवस्था और दुनिया भर में भारत की धाक, दोनों के लिए बहुत बड़ी बात है।

 

4. सप्लाई चेन में स्थिरता

अमेरिका की कई बड़ी कंपनियां—खासकर रिटेल स्टोर्स और दवाइयों (हेल्थकेयर) वाली—भारत से ही अपना माल मंगाती हैं। जब टैक्स बढ़ने का डर था, तो इनमें से कुछ कंपनियां दूसरे देशों में नए सप्लायर्स ढूंढने लगी थीं। लेकिन अब कोर्ट के फैसले के बाद उनकी घबराहट थोड़ी कम हुई है। इससे फायदा यह होगा कि भारतीय कारोबारियों के हाथ से ऑर्डर जाने का खतरा कम हो जाएगा और उनके पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स सुरक्षित रहेंगे। यह बदलाव भले ही शोर-शराबे वाला न दिखे, पर बिजनेस को टिकाऊ बनाने के लिए बहुत जरूरी है

 

लेकिन 15% अस्थायी टैरिफ की चुनौती भी (US trade law limits presidential tariff power)

कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने 150 दिनों के लिए 15% का अस्थायी टैक्स (टैरिफ) लगाने का ऐलान कर दिया है, जिसने थोड़ी टेंशन बढ़ा दी है। अगले कुछ महीनों के लिए इससे कुछ मुश्किलें आ सकती हैं, जैसे

  • कुछ सामान महंगे हो सकते हैं।
  • कंपनियों के मुनाफे (प्रॉफिट) में कमी आ सकती है।
  • बाज़ार में थोड़ी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकती है।

हालांकि, यह टैक्स हमेशा के लिए नहीं है, फिर भी सामान बाहर भेजने वाले कारोबारियों को अगले कुछ महीने फूंक-फूंक कर कदम रखने होंगे।”

आगे की राह: अवसर या परीक्षा?

कुल मिलाकर देखें तो यह फैसला भारत के लिए रणनीतिक रूप से सकारात्मक है।

  • अचानक टैरिफ झटकों का खतरा कम हुआ
  • निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद
  • व्यापार वार्ता में मजबूत स्थिति
  • सप्लाई चेन में भरोसा कायम

लेकिन साथ ही 15% अस्थायी शुल्क एक याद दिलाता है कि वैश्विक व्यापार राजनीति में सब कुछ स्थायी नहीं होता। भारत के लिए अब असली चुनौती यह है कि वह इस मौके को दीर्घकालिक लाभ में कैसे बदले—निर्यात बढ़ाकर, नए सेक्टर खोलकर और अमेरिका के साथ संतुलित व्यापार संबंध बनाकर। एक बात साफ है—यह सिर्फ कानूनी फैसला नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन में बदलाव का संकेत है। भारत के लिए यह राहत भी है और जिम्मेदारी भी।

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