6-3 के फैसले के बाद अमेरिका में बढ़ी तकरार: सुप्रीम कोर्ट पर राष्ट्रपति का तीखा प्रहार, ‘लाइसेंस’ को बनाया नया हथियार
Trump Supreme Court clash: –अमेरिका में टैरिफ नीति को लेकर सियासी घमासान अब खुलकर सामने आ गया है। सुप्रीम कोर्ट के 6-3 के बहुमत वाले फैसले के बाद राष्ट्रपति ने जिस अंदाज में अदालत पर सवाल उठाए हैं, उसने बहस को और गरमा दिया है। उनका कहना है कि कोर्ट के इस निर्णय से वे देश मजबूत होंगे, जो अमेरिकी व्यापार का फायदा उठा रहे हैं। राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि अगर दूसरे देश अमेरिका से व्यापार करने के लिए लाइसेंस और भारी फीस वसूल सकते हैं, तो अमेरिका भी ऐसा कदम उठाने से क्यों पीछे रहे? उन्होंने साफ संकेत दिए कि अब वे “लाइसेंस व्यवस्था” को सख्ती से लागू कर सकते हैं।
क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति के एकतरफा टैरिफ आदेश पर रोक लगा दी। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी के बिना असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करना कानूनी दायरे से बाहर है। हालांकि कोर्ट ने पहले से लागू टैरिफ को तुरंत खत्म नहीं किया, लेकिन भविष्य में ऐसे फैसलों पर सीमाएं तय कर दीं। यही बात व्हाइट हाउस को नागवार गुजरी।
‘लाइसेंस’ पर सख्त रुख क्यों? Trump Supreme Court clash
राष्ट्रपति का तर्क है कि कई देश अमेरिकी कंपनियों पर अलग-अलग तरह के लाइसेंस शुल्क और शर्तें थोपते हैं। ऐसे में अमेरिका भी अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए समान कदम उठा सकता है। उनके मुताबिक, यह कदम उन देशों को “सबक” सिखाने के लिए होगा, जो अमेरिकी बाजार का लाभ तो लेते हैं लेकिन बराबरी का व्यवहार नहीं करते।
न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका: नई बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका में एक बार फिर न्यायपालिका और कार्यपालिका के अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है। राष्ट्रपति ने इशारा किया है कि आने वाले समय में चीन या नागरिकता जैसे मुद्दों पर भी अदालत ऐसे फैसले दे सकती है, जो सरकार की नीतियों से टकरा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव केवल टैरिफ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संवैधानिक शक्तियों की सीमा तक जा सकता है।
वैश्विक बाजार पर संभावित असर
अगर अमेरिका लाइसेंस आधारित सख्त नीति अपनाता है तो उसके प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेंगे।
- आयात-निर्यात महंगा हो सकता है
- वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा आ सकती है
- शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है
- भारत जैसे निर्यातक देशों को अप्रत्यक्ष झटका लग सकता है
हालांकि समर्थकों का दावा है कि इससे अमेरिकी उद्योग को सुरक्षा मिलेगी और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
सकारात्मक बनाम नकारात्मक संकेत
सकारात्मक पहलू
- घरेलू उद्योगों को संरक्षण
- व्यापार घाटा कम करने की कोशिश
- वैश्विक मंच पर सख्त संदेश
नकारात्मक आशंकाएं
- संभावित व्यापार युद्ध
- निवेशकों की चिंता
- कूटनीतिक रिश्तों में तनाव
अब सबकी नजर इस पर है कि प्रशासन लाइसेंस नीति को किस रूप में लागू करता है और कांग्रेस का रुख क्या रहता है। यदि दोनों संस्थाओं के बीच टकराव बढ़ता है, तो यह अमेरिका की आर्थिक नीति और वैश्विक व्यापार समीकरणों को नई दिशा दे सकता है। साफ है कि 6-3 के इस फैसले ने केवल कानूनी सीमा तय नहीं की, बल्कि अमेरिकी राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह विवाद अमेरिका ही नहीं, दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम साबित हो सकता है।
