50 हजार मोबाइल पर आया रहस्यमयी मैसेज: ईरान में बढ़ा डर
Iran mysterious SMS ईरान में सोमवार की सुबह आम दिनों जैसी नहीं थी। हजारों लोगों के मोबाइल फोन एक साथ बजे और स्क्रीन पर एक ऐसा संदेश उभरा, जिसने पूरे देश में बेचैनी फैला दी। मैसेज में लिखा था अमेरिकी राष्ट्रपति जो कहते हैं, वो करते हैं… बस इंतजार करो और देखो।” ऐसे समय में जब ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही तनाव चरम पर है, इस संदेश ने आम नागरिकों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए। क्या कोई बड़ा सैन्य कदम उठने वाला है? क्या यह आधिकारिक चेतावनी थी? या फिर किसी की सोची-समझी शरारत?
50,000 लोगों तक पहुंचा मैसेज, Iran mysterious SMS
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, यह संदेश करीब 50 हजार मोबाइल सब्सक्राइबर्स तक पहुंचा। बड़ी संख्या में लोगों के फोन पर एक साथ ऐसा संदेश आने से सोशल मीडिया और स्थानीय इलाकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे संभावित हमले का संकेत माना, तो कुछ ने इसे मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति बताया। बाजारों, दफ्तरों और विश्वविद्यालयों में यही चर्चा थी कि आखिर यह मैसेज आया कहां से?
जांच में सामने आई साइबर हैकिंग की बात
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि यह संदेश किसी सरकारी एजेंसी की ओर से जारी नहीं किया गया था। बताया जा रहा है कि एक बल्क मैसेजिंग सिस्टम, जो आमतौर पर विज्ञापन या प्रचार संदेश भेजने के लिए इस्तेमाल होता है, उसे हैक कर इस राजनीतिक संदेश को फैलाया गया। यानी राहत की बात यह रही कि यह कोई आधिकारिक सैन्य चेतावनी नहीं थी। लेकिन चिंता की बात यह है कि साइबर सिस्टम की सुरक्षा में सेंध लगाकर इतने बड़े पैमाने पर संदेश फैलाना अपने आप में गंभीर मामला है।
अमेरिका का कड़ा रुख
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल के दिनों में ईरान को लेकर सख्त बयान दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन ने संकेत दिया है कि समझौते के लिए समय सीमित है और जरूरत पड़ी तो सैन्य विकल्प भी खुले हैं। इसी वजह से यह मैसेज लोगों के मन में डर पैदा करने में सफल रहा। क्योंकि जब बयानबाजी पहले से तीखी हो, तब एक छोटा-सा संदेश भी बड़ी हलचल मचा सकता है।
इंटरनेट ब्लैकआउट: 9 करोड़ लोग प्रभावित
तनाव के बीच ईरान में इंटरनेट और टेलीकॉम सेवाओं पर भी सख्ती बढ़ाई गई। 8 जनवरी की रात देश के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं अचानक बंद कर दी गईं। कुछ इलाकों में कॉल और एसएमएस सेवाएं भी प्रभावित हुईं। बताया जा रहा है कि यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा इंटरनेट शटडाउन था, जिससे करीब 9 करोड़ की आबादी प्रभावित हुई। सरकार का कहना है कि यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया, जबकि आलोचकों का मानना है कि इससे आम जनता की आवाज दबती है।
ईरान की चेतावनी और कूटनीति की कोशिश
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने साफ किया है कि उनका देश बातचीत के रास्ते समाधान चाहता है। जिनेवा में संभावित वार्ता की तैयारी भी चल रही है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान पर हमला हुआ, तो जवाब कड़ा होगा। यानी एक तरफ बातचीत की मेज सजी है, तो दूसरी ओर युद्ध के बादल भी छाए हुए हैं।
डिजिटल दौर की नई जंग
यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि आज की लड़ाई केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन पर भी लड़ी जा रही है। एक मैसेज हजारों लोगों की सोच को प्रभावित कर सकता है। सकारात्मक पहलू यह है कि जांच एजेंसियों ने जल्दी साफ कर दिया कि मामला हैकिंग का है। नकारात्मक पहलू यह है कि ऐसे साइबर हमले किसी भी समय माहौल को भड़का सकते हैं।
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