3 दिनों में 2,000 अंकों की तेज गिरावट: 869 शेयर 52-वीक लो पर, निवेशकों के ₹10 लाख करोड़ डूबे
Massive 2,000 Point Crash: 869 Stocks Hit 52 Week Low: –शेयर बाजार में इस हफ्ते की शुरुआत बेहद भारी माहौल के साथ हुई। लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट के बीच भारतीय बाजार ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को BSE Sensex 1,048 अंक टूटकर 80,238.85 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 भी 313 अंकों की गिरावट के साथ 24,865.70 पर आ गया। अगर पिछले तीन सत्रों की बात करें तो सेंसेक्स करीब 2,037 अंक लुढ़क चुका है। इस दौरान निवेशकों की लगभग ₹10 लाख करोड़ की संपत्ति साफ हो गई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹467.4 लाख करोड़ से घटकर ₹457 लाख करोड़ से नीचे पहुंच गया।
869 शेयर 52-वीक लो पर (869 Stocks Hit 52 Week Low)
सोमवार की गिरावट सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही। बीएसई पर 869 शेयर अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर तक फिसल गए। यह साफ संकेत है कि बाजार में बिकवाली व्यापक रही। इनमें कई बड़े और चर्चित नाम शामिल रहे:
- Tata Consultancy Services
- Wipro
- Trent Limited
- Coforge
- Dixon Technologies
- Info Edge\
- Shree Cement
- SRF Limited
- Suzlon Energy
रेलवे और सरकारी कंपनियों में भी दबाव दिखा। IRCTC, IREDA, IRFC और NHPC जैसे शेयर भी निचले स्तरों पर देखे गए। हालांकि कमजोरी के बीच कुछ शेयरों ने मजबूती भी दिखाई। 94 कंपनियों ने 52-वीक हाई छुआ, जिनमें ONGC और SAIL शामिल रहे।
सेंसेक्स के 30 में से सिर्फ 3 शेयर हरे निशान में
आज के कारोबार में 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में सिर्फ तीन कंपनियां बढ़त के साथ बंद हो पाईं:
- Bharat Electronics Limited (लगभग 2% की तेजी)
- Sun Pharmaceutical Industries
- ITC Limited
वहीं गिरावट की मार सबसे ज्यादा इन पर पड़ी:
- InterGlobe Aviation (करीब 6% टूटे)
- Larsen & Toubro
- Adani Ports & SEZ
बीएसई पर 20 से ज्यादा शेयरों में 15% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि 11 शेयर ऐसे भी रहे जिन्होंने 15% से ज्यादा की छलांग लगाकर बाजार की कमजोरी को चुनौती दी।
गिरावट की वजह क्या है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की कमजोरी से महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए यह स्थिति फिस्कल बैलेंस और कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव डाल सकती है, खासकर उन सेक्टरों में जो ऊर्जा और केमिकल पर निर्भर हैं।
क्या यहां से वापसी संभव है?
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि बाजार फिलहाल कमजोर जरूर है, लेकिन ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है।
- 24,750 का स्तर निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है।
- अगर यह स्तर बना रहता है तो 25,000–25,075 तक हल्की रिकवरी संभव है।
- लेकिन 24,750 के नीचे फिसलने पर 24,500 तक दबाव बढ़ सकता है।
आम निवेशक क्या करें?
ऐसे समय में सबसे बड़ी गलती घबराहट में फैसला लेना होता है।
- अगर आपके पास मजबूत फंडामेंटल वाले शेयर हैं तो लंबी अवधि का नजरिया रखें।
- जरूरत से ज्यादा लिवरेज से बचें।
- नए निवेश से पहले बाजार का ट्रेंड साफ होने दें।
- पोर्टफोलियो में विविधता (diversification) बनाए रखें।
निष्कर्ष: डर का दौर या अवसर का समय?
शेयर बाजार में गिरावट नई बात नहीं है। हर तेज गिरावट अपने साथ जोखिम भी लाती है और मौके भी। अभी का माहौल निश्चित रूप से नकारात्मक है, लेकिन ऐसे ही समय में धैर्यवान निवेशक लंबी अवधि के लिए बेहतर पोजिशन बना पाते हैं। बाजार की दिशा अगले कुछ सत्रों में ग्लोबल संकेतों और कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी। फिलहाल सावधानी, संयम और सोच-समझकर निवेश करना ही समझदारी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
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